
हिंदू · 9 मई 2027
अक्षय तृतीया
“अक्षय” दिन: आज शुरू किया या दिया गया काम कभी समाप्त नहीं होता, ऐसी मान्यता है।
क्यों मनाया जाता है
अक्षय का अर्थ है “जो कभी घटे नहीं”। वैशाख शुक्ल तृतीया उन गिने-चुने दिनों में है जो पूरे दिन शुभ हैं — इसे अबूझ मुहूर्त कहते हैं।
इसके पीछे की कथा
इस दिन कई कथाएँ जुड़ी हैं। भगवान परशुराम का जन्म इसी दिन हुआ। वनवास में पांडवों को सूर्यदेव से अक्षय पात्र मिला, जिसमें भोजन कभी ख़त्म नहीं होता था। सुदामा मुट्ठी भर चिवड़ा लेकर अपने बचपन के मित्र कृष्ण से मिलने गए, और लौटे तो उनकी कुटिया महल बन चुकी थी। मान्यता है कि गंगा जी का पृथ्वी पर अवतरण भी इसी दिन हुआ।
कैसे मनाएँ
- कोई नया काम शुरू करें — व्यापार, गृह प्रवेश, पढ़ाई
- चाहें तो सोना-चाँदी ख़रीदें, या दान करें
- गर्मी में जल, घड़ा, अनाज या पंखा दान करें
- लक्ष्मी-नारायण की पूजा करें
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