
हिंदू · 11 नवंबर 2026
भाई दूज
बहनें भाई की लंबी आयु की कामना करती हैं; भाई उनके घर उपहार लेकर आते हैं।
क्यों मनाया जाता है
कार्तिक शुक्ल द्वितीया, दिवाली के दो दिन बाद, बहनें भाई को तिलक लगाती हैं — इसे यम द्वितीया और भाऊ बीज भी कहते हैं।
इसके पीछे की कथा
यमुना जी बहुत समय से अपने भाई यमराज को घर बुला रही थीं। इस दिन आख़िर वे आए। यमुना ने तिलक, आरती और भोजन से उनका स्वागत किया। प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई आज बहन से तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं होगा। कहते हैं नरकासुर वध के बाद श्रीकृष्ण भी इसी दिन बहन सुभद्रा से मिलने गए थे।
कैसे मनाएँ
- बहनें तिलक, आरती करें और भाई को भोजन कराएँ
- भाई उपहार और आशीर्वाद दें
- मथुरा में हों तो यमुना स्नान करें
- दूर रहने वाले भाई-बहनों को फ़ोन करें या मिलने जाएँ
व्रत कथा
भाई दूज की कथा
सूर्यदेव की पत्नी संज्ञा से दो संतानें हुईं — पुत्र यमराज और पुत्री यमुना। दोनों भाई-बहन में बहुत प्रेम था। बड़े होने पर यमराज यमलोक के राजा बने, और यमुना पृथ्वी पर नदी बनकर बहने लगीं।
यमुना बार-बार अपने भाई को अपने घर भोजन के लिए बुलातीं, “भैया, एक बार मेरे घर आओ।” पर यमराज अपने काम में व्यस्त रहते और टालते रहते — “बहन, अगली बार ज़रूर आऊँगा।”
एक दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज ने सोचा, “मैं तो सबके प्राण हरता हूँ, कोई मुझे अपने घर नहीं बुलाता; पर मेरी बहन इतने प्रेम से बुलाती है, आज मुझे जाना ही चाहिए।” वे बिना बताए यमुना के घर पहुँच गए।
भाई को अचानक द्वार पर देखकर यमुना की ख़ुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने स्नान करके भाई का स्वागत किया, माथे पर तिलक लगाया, आरती उतारी, और अपने हाथों से बनाए पकवान प्रेम से खिलाए।
बहन के इस प्रेम से यमराज बहुत प्रसन्न हुए और बोले, “बहन, कोई वर माँगो।” यमुना ने कहा, “भैया, आप हर साल इसी दिन मेरे घर आया करें, और जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर उससे तिलक करवाए और उसके हाथ का भोजन करे, उसे अकाल मृत्यु का भय न हो।”
यमराज ने “तथास्तु” कहा और बहन को वस्त्र-आभूषण भेंट करके यमलोक लौट गए। तभी से यह दिन यम द्वितीया या भाई दूज कहलाया। इस दिन भाई बहन के घर जाते हैं, बहनें तिलक करके भाई की लंबी आयु की कामना करती हैं, और भाई उपहार देकर रक्षा का वचन देते हैं।
हे यमराज और यमुना मैया, सब भाई-बहनों का प्रेम ऐसे ही अटूट रखना।
॥ इति कथा समाप्त ॥
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