
क्यों मनाया जाता है
विघ्नहर्ता गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मध्याह्न में हुआ। उत्सव अनंत चतुर्दशी तक चलता है।
इसके पीछे की कथा
माता पार्वती ने अपने उबटन से एक बालक बनाया और उसे द्वार पर पहरा देने को कहा। शिव जी लौटे तो बालक ने उन्हें रोका; क्रोध में शिव ने उसका सिर काट दिया। पार्वती को शांत करने के लिए शिव ने बालक पर हाथी का सिर लगाया और उसे अपने गणों का अधिपति — गणपति — बनाया, जिनकी पूजा हर काम से पहले होती है। लोकमान्य तिलक ने 1893 में लोगों को जोड़ने के लिए इसे सार्वजनिक उत्सव बनाया।
कैसे मनाएँ
- मिट्टी के गणेश जी लाकर मध्याह्न में स्थापना करें
- मोदक, दूर्वा और लाल फूल चढ़ाएँ
- सुबह-शाम आरती करें
- परंपरा के अनुसार आज रात चंद्रमा न देखें
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