Aryan — Noble warrior
Zara — Blooming flower
Vihaan — New dawn
Myra — Sweet beloved
Advait — Unique one
Aisha — Alive, prosperous
Rehan — Fragrant breeze
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Dhruv — North star
Anaya — Caring free soul
Kabir — The great one
Saanvi — Goddess Lakshmi
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चित्र: नाग पंचमी

हिंदू · 6 अगस्त 2027

नाग पंचमी

नाग देवता की पूजा और आभार; आज धरती नहीं खोदी जाती।

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क्यों मनाया जाता है

श्रावण शुक्ल पंचमी को परिवार नाग देवता की पूजा करते हैं — रक्षा के लिए, ख़ासकर बरसात में जब साँप बिलों से बाहर निकलते हैं।

इसके पीछे की कथा

महाभारत में राजा जनमेजय ने अपने पिता परीक्षित की तक्षक नाग के डसने से मृत्यु के बाद सभी नागों को नष्ट करने के लिए सर्प-यज्ञ किया। मुनि आस्तिक ने पंचमी के दिन वह यज्ञ रुकवाकर नागों की रक्षा की। यमुना में कालिया नाग पर श्रीकृष्ण की विजय भी याद की जाती है। साँप चूहों से फ़सल बचाते हैं — यह दिन उनके प्रति सम्मान सिखाता है।

कैसे मनाएँ

  • द्वार पर हल्दी या चंदन से नाग बनाकर पूजा करें
  • बाँबी या मंदिर में दूध, फूल और अक्षत चढ़ाएँ (जीवित साँप को नहीं)
  • आज धरती न खोदें
  • बच्चों को आस्तिक मुनि और कालिया की कथा सुनाएँ

व्रत कथा

नाग पंचमी व्रत कथा

🔊 पूरी कथा सुनें

प्राचीन समय में एक किसान अपनी पत्नी, दो बेटों और एक बेटी के साथ रहता था। एक दिन खेत में हल चलाते हुए अनजाने में उसके हल के फाल से एक नागिन के तीन बच्चे कुचलकर मर गए।

जब नागिन लौटी और अपने बच्चों को मरा देखा, तो वह शोक और क्रोध से भर गई। उसने बदला लेने की ठानी। रात में उसने किसान, उसकी पत्नी और दोनों बेटों को डस लिया, और सब मर गए।

अगली सुबह नागिन किसान की बेटी को भी डसने चली। पर वहाँ उसने देखा कि वह कन्या एक कटोरे में दूध रखकर, हाथ जोड़कर नाग देवता की पूजा कर रही है और क्षमा माँग रही है — “हे नाग माता, हमारे परिवार से जो भी भूल हुई हो, उसे क्षमा करना।”

कन्या की श्रद्धा और विनम्रता देखकर नागिन का क्रोध शांत हो गया। उसने दूध पिया और प्रसन्न होकर कहा, “बेटी, वर माँग।” कन्या बोली, “माता, मेरे माता-पिता और भाइयों को जीवन लौटा दीजिए, और आज के दिन जो भी नाग देवता की पूजा करे, उसे कभी सर्प-भय न हो।”

नागिन ने अमृत से किसान के परिवार को जीवित कर दिया और वरदान दिया। उस दिन श्रावण शुक्ल पंचमी थी। तभी से इस दिन नाग देवता की पूजा होती है, धरती नहीं खोदी जाती, और हल नहीं चलाया जाता।

एक और कथा में एक बहू अपने मायके नहीं जा पाती थी क्योंकि उसका कोई भाई नहीं था। उसने एक नाग को भाई मानकर पूजा की; नाग ने भी उसे बहन माना और हर संकट में उसकी रक्षा की। इसलिए कई जगह स्त्रियाँ नाग पंचमी पर नाग देवता को भाई मानकर पूजती हैं।

हे नाग देवता, जैसे आपने किसान की बेटी पर कृपा की, वैसे ही सबके परिवार की रक्षा करना। बोलो नाग देवता की जय!

॥ इति कथा समाप्त ॥

इस कैलेंडर से और

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पुराणों, महाकाव्यों और लोक परंपरा की कथाएँ, सरल शब्दों में। रीति-रिवाज और तिथियाँ क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग हो सकती हैं — व्रत या संस्कार के लिए अपने परिवार की परंपरा या पुरोहित का पालन करें।

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