हिंदू · 2068 · New Delhi
हिंदू त्योहार और व्रत कैलेंडर 2068
साल के सभी प्रमुख त्योहार, और हर एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या, प्रदोष, चतुर्थी, शिवरात्रि व संक्रांति — दिन-प्रतिदिन पंचांग से गणना, इस शहर के लिए: New Delhi.
किसी भी त्योहार या व्रत पर टैप करें — क्यों मनाया जाता है, उसकी कथा और कैसे मनाएँ, सब पढ़ें। कथाएँ सुन भी सकते हैं।
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जनवरी 2068
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14शनिमकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर पंजाब का सर्दियों का अलाव-पर्व। कथा →
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15रविसूर्य मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होते हैं: मकर संक्रांति, पोंगल, उत्तरायण, बिहू। कथा →
फ़रवरी 2068
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7मंगलवसंत का आगमन और विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा। कथा →
मार्च 2068
अप्रैल 2068
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3मंगलहिंदू नव वर्ष: चैत्र नवरात्रि का आरंभ — महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, दक्षिण में उगादि। कथा →
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10मंगलभगवान श्रीराम का जन्मदिन — अयोध्या में मध्याह्न में जन्म। कथा →
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14शनिमेष संक्रांति: सौर नव वर्ष — बैसाखी, बोहाग बिहू, पणा संक्रांति, पुथांडु, विशु। कथा →
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17मंगलश्रीराम के परम भक्त और बल के देवता हनुमान जी का जन्मदिन। कथा →
मई 2068
जुलाई 2068
अगस्त 2068
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1बुधसावन का हरा-भरा त्योहार — शिव और पार्वती के मिलन का उत्सव। कथा →
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3शुक्रनाग देवता की पूजा और आभार; आज धरती नहीं खोदी जाती। कथा →
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13सोमबहनें भाई की कलाई पर राखी बाँधती हैं; भाई रक्षा का वचन देते हैं। कथा →
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19रविमथुरा में मध्यरात्रि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म। कथा →
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30गुरुस्त्रियों का कठोर व्रत — शिव को पाने के लिए पार्वती के तप की याद में। कथा →
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31शुक्रभगवान गणेश का जन्मदिन; दस दिन की पूजा शुरू होती है। कथा →
सितंबर 2068
अक्टूबर 2068
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4गुरुनवरात्रि का आठवाँ दिन: महागौरी पूजा और कन्या पूजन। कथा →
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5शुक्रनवरात्रि का नौवाँ दिन: सिद्धिदात्री पूजा, आयुध पूजा और हवन। कथा →
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6शनिविजयादशमी: रावण पर श्रीराम और महिषासुर पर माँ दुर्गा की विजय। कथा →
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10बुधसाल की सबसे उजली पूर्णिमा; रात भर चाँदनी में खीर रखी जाती है। कथा →
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14रविसुहागिनें पति की लंबी आयु के लिए सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत रखती हैं। कथा →
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17बुधमाताएँ संतान की कुशलता के लिए तारे निकलने तक व्रत रखती हैं। कथा →
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23मंगलदीपावली का पहला दिन: धन्वंतरि और लक्ष्मी की पूजा, नए बर्तन या सोने की ख़रीद। कथा →
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24बुधछोटी दिवाली: राक्षस नरकासुर पर श्रीकृष्ण की विजय। कथा →
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25गुरुदीपों का पर्व: कार्तिक अमावस्या को लक्ष्मी पूजा और श्रीराम का अयोध्या आगमन। कथा →
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27शनिश्रीकृष्ण ने ब्रज की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया; अन्नकूट का भोग लगता है। कथा →
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28रविबहनें भाई की लंबी आयु की कामना करती हैं; भाई उनके घर उपहार लेकर आते हैं। कथा →
नवंबर 2068
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1गुरुसूर्यदेव और छठी मैया की चार दिन की पूजा — डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य। कथा →
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5सोमचार महीने की योगनिद्रा से विष्णु जागते हैं; विवाह फिर शुरू होते हैं। तुलसी विवाह होता है। कथा →
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9शुक्रदेव दीपावली: वाराणसी के घाटों पर देवताओं की दिवाली; गुरु नानक जयंती भी। कथा →
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29गुरुश्रीराम और सीता के विवाह की वर्षगाँठ। कथा →
दिसंबर 2068
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5बुधजिस दिन कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया। कथा →
तारीखें कैसे निकाली गईं
यह कैलेंडर किसी सूची से नकल नहीं, गणना से बना है: साल के हर दिन के लिए आपके शहर में सूर्योदय, मध्याह्न, अपराह्न, प्रदोष, चंद्रोदय और मध्यरात्रि की तिथि निकाली जाती है — उसी एफ़ेमेरिस से जिससे हमारी कुंडली बनती है।
त्योहार उस दिन माना जाता है जिस दिन सूर्योदय पर उसकी तिथि हो (उदया तिथि); परंपरा जहाँ कोई और समय देखती है, वहाँ वही समय लिया गया है: दिवाली, धनतेरस, प्रदोष और होलिका दहन — संध्या (प्रदोष); जन्माष्टमी और शिवरात्रि — मध्यरात्रि (निशीथ); करवा चौथ और संकष्टी — चंद्रोदय; राम नवमी और गणेश चतुर्थी — मध्याह्न; दशहरा और महा नवमी — अपराह्न। पूर्णिमा की संध्या पर भद्रा हो तो होलिका दहन अगली संध्या को।
मास अमांत (अमावस्या से अमावस्या) हैं; जिस मास में संक्रांति न हो वह अधिक मास है। उत्तर भारत में कृष्ण पक्ष अगले मास के नाम से गिना जाता है (पूर्णिमांत) — त्योहारों की तारीखें वही रहती हैं। वैष्णव एकादशी और स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है; व्रत या संस्कार के लिए अपने कुल-पुरोहित से पुष्टि कर लें।





































