Aryan — Noble warrior
Zara — Blooming flower
Vihaan — New dawn
Myra — Sweet beloved
Advait — Unique one
Aisha — Alive, prosperous
Rehan — Fragrant breeze
Pari — Fairy angel
Dhruv — North star
Anaya — Caring free soul
Kabir — The great one
Saanvi — Goddess Lakshmi
Riya — Singer graceful
Arjun — White silver
Layla — Night beauty
Vivaan — Full of life
Kyra — Sunlight
Ishaan — Lord of Sun
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हिंदू · 2004 · New Delhi

हिंदू त्योहार और व्रत कैलेंडर 2004

साल के सभी प्रमुख त्योहार, और हर एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या, प्रदोष, चतुर्थी, शिवरात्रि व संक्रांति — दिन-प्रतिदिन पंचांग से गणना, इस शहर के लिए: New Delhi.

किसी भी त्योहार या व्रत पर टैप करें — क्यों मनाया जाता है, उसकी कथा और कैसे मनाएँ, सब पढ़ें। कथाएँ सुन भी सकते हैं।

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जनवरी 2004

  1. 14बुध
    मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर पंजाब का सर्दियों का अलाव-पर्व। कथा →
  2. 15गुरु
    सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होते हैं: मकर संक्रांति, पोंगल, उत्तरायण, बिहू। कथा →
  3. 26सोम
    वसंत का आगमन और विद्या की देवी माँ सरस्वती की पूजा। कथा →
    माघ
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हिंदू त्योहार और व्रत · New Delhi — मुफ़्त, और कभी भी बंद कर सकते हैं।

आपको क्या चाहिए?

फ़रवरी 2004

  1. 18बुध
    शिव की महान रात्रि: व्रत, रात भर पूजा और अभिषेक। कथा →
    माघ
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मार्च 2004

  1. 6शनि
    होली से पहले की संध्या की होलिका: प्रह्लाद बचते हैं और होलिका जलती है। कथा →
    फाल्गुन
  2. 7रवि
    रंगों का पर्व: वसंत, मित्रता और राधा-कृष्ण का प्रेम। कथा →
    फाल्गुन
  3. 21रवि
    हिंदू नव वर्ष: चैत्र नवरात्रि का आरंभ — महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, दक्षिण में उगादि। कथा →
    चैत्र
  4. 30मंगल
    भगवान श्रीराम का जन्मदिन — अयोध्या में मध्याह्न में जन्म। कथा →
    चैत्र
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अप्रैल 2004

  1. 5सोम
    श्रीराम के परम भक्त और बल के देवता हनुमान जी का जन्मदिन। कथा →
    चैत्र
  2. 13मंगल
    मेष संक्रांति: सौर नव वर्ष — बैसाखी, बोहाग बिहू, पणा संक्रांति, पुथांडु, विशु। कथा →
  3. 22गुरु
    “अक्षय” दिन: आज शुरू किया या दिया गया काम कभी समाप्त नहीं होता, ऐसी मान्यता है। कथा →
    वैशाख
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मई 2004

  1. 4मंगल
    बुद्ध का जन्म, बोधि और महापरिनिर्वाण — तीनों वैशाख पूर्णिमा को। कथा →
    वैशाख
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जून 2004

  1. 19शनि
    भगवान जगन्नाथ विशाल रथ पर पुरी के मंदिर से निकलकर भक्तों से मिलने आते हैं। कथा →
    आषाढ़
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जुलाई 2004

  1. 2शुक्र
    गुरुओं और शिक्षकों के प्रति आभार का दिन; इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं। कथा →
    आषाढ़
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अगस्त 2004

  1. 19गुरु
    सावन का हरा-भरा त्योहार — शिव और पार्वती के मिलन का उत्सव। कथा →
    श्रावण
  2. 21शनि
    नाग देवता की पूजा और आभार; आज धरती नहीं खोदी जाती। कथा →
    श्रावण
  3. 30सोम
    बहनें भाई की कलाई पर राखी बाँधती हैं; भाई रक्षा का वचन देते हैं। कथा →
    श्रावण
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सितंबर 2004

  1. 6सोम
    मथुरा में मध्यरात्रि को भगवान श्रीकृष्ण का जन्म। कथा →
    श्रावण
  2. 17शुक्र
    स्त्रियों का कठोर व्रत — शिव को पाने के लिए पार्वती के तप की याद में। कथा →
    भाद्रपद
  3. 18शनि
    भगवान गणेश का जन्मदिन; दस दिन की पूजा शुरू होती है। कथा →
    भाद्रपद
  4. 27सोम
    अनंत रूप में विष्णु की पूजा, और गणेश जी की विदाई (विसर्जन)। कथा →
    भाद्रपद
  5. 29बुध
    पूर्वजों को याद करने और उन्हें भोजन अर्पित करने (श्राद्ध) के पंद्रह दिन। कथा →
    भाद्रपद
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अक्टूबर 2004

  1. 14गुरु
    पितृ पक्ष का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन — सभी पितरों के लिए। कथा →
    भाद्रपद
  2. 15शुक्र
    देवी के नौ रातें: माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा। कथा →
    आश्विन
  3. 21गुरु
    नवरात्रि का आठवाँ दिन: महागौरी पूजा और कन्या पूजन। कथा →
    आश्विन
  4. 22शुक्र
    विजयादशमी: रावण पर श्रीराम और महिषासुर पर माँ दुर्गा की विजय। कथा →
    आश्विन
  5. 22शुक्र
    नवरात्रि का नौवाँ दिन: सिद्धिदात्री पूजा, आयुध पूजा और हवन। कथा →
    आश्विन
  6. 27बुध
    साल की सबसे उजली पूर्णिमा; रात भर चाँदनी में खीर रखी जाती है। कथा →
    आश्विन
  7. 31रवि
    सुहागिनें पति की लंबी आयु के लिए सूर्योदय से चंद्रोदय तक व्रत रखती हैं। कथा →
    आश्विन
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नवंबर 2004

  1. 5शुक्र
    माताएँ संतान की कुशलता के लिए तारे निकलने तक व्रत रखती हैं। कथा →
    आश्विन
  2. 10बुध
    दीपावली का पहला दिन: धन्वंतरि और लक्ष्मी की पूजा, नए बर्तन या सोने की ख़रीद। कथा →
    आश्विन
  3. 11गुरु
    छोटी दिवाली: राक्षस नरकासुर पर श्रीकृष्ण की विजय। कथा →
    आश्विन
  4. 12शुक्र
    दीपों का पर्व: कार्तिक अमावस्या को लक्ष्मी पूजा और श्रीराम का अयोध्या आगमन। कथा →
    आश्विन
  5. 13शनि
    श्रीकृष्ण ने ब्रज की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया; अन्नकूट का भोग लगता है। कथा →
    कार्तिक
  6. 14रवि
    बहनें भाई की लंबी आयु की कामना करती हैं; भाई उनके घर उपहार लेकर आते हैं। कथा →
    कार्तिक
  7. 17बुध
    सूर्यदेव और छठी मैया की चार दिन की पूजा — डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य। कथा →
    कार्तिक
  8. 22सोम
    चार महीने की योगनिद्रा से विष्णु जागते हैं; विवाह फिर शुरू होते हैं। तुलसी विवाह होता है। कथा →
    कार्तिक
  9. 26शुक्र
    देव दीपावली: वाराणसी के घाटों पर देवताओं की दिवाली; गुरु नानक जयंती भी। कथा →
    कार्तिक
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दिसंबर 2004

  1. 16गुरु
    श्रीराम और सीता के विवाह की वर्षगाँठ। कथा →
    मार्गशीर्ष
  2. 22बुध
    जिस दिन कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया। कथा →
    मार्गशीर्ष
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तारीखें कैसे निकाली गईं

यह कैलेंडर किसी सूची से नकल नहीं, गणना से बना है: साल के हर दिन के लिए आपके शहर में सूर्योदय, मध्याह्न, अपराह्न, प्रदोष, चंद्रोदय और मध्यरात्रि की तिथि निकाली जाती है — उसी एफ़ेमेरिस से जिससे हमारी कुंडली बनती है।

त्योहार उस दिन माना जाता है जिस दिन सूर्योदय पर उसकी तिथि हो (उदया तिथि); परंपरा जहाँ कोई और समय देखती है, वहाँ वही समय लिया गया है: दिवाली, धनतेरस, प्रदोष और होलिका दहन — संध्या (प्रदोष); जन्माष्टमी और शिवरात्रि — मध्यरात्रि (निशीथ); करवा चौथ और संकष्टी — चंद्रोदय; राम नवमी और गणेश चतुर्थी — मध्याह्न; दशहरा और महा नवमी — अपराह्न। पूर्णिमा की संध्या पर भद्रा हो तो होलिका दहन अगली संध्या को।

मास अमांत (अमावस्या से अमावस्या) हैं; जिस मास में संक्रांति न हो वह अधिक मास है। उत्तर भारत में कृष्ण पक्ष अगले मास के नाम से गिना जाता है (पूर्णिमांत) — त्योहारों की तारीखें वही रहती हैं। वैष्णव एकादशी और स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है; व्रत या संस्कार के लिए अपने कुल-पुरोहित से पुष्टि कर लें।

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