Aryan — Noble warrior
Zara — Blooming flower
Vihaan — New dawn
Myra — Sweet beloved
Advait — Unique one
Aisha — Alive, prosperous
Rehan — Fragrant breeze
Pari — Fairy angel
Dhruv — North star
Anaya — Caring free soul
Kabir — The great one
Saanvi — Goddess Lakshmi
Riya — Singer graceful
Arjun — White silver
Layla — Night beauty
Vivaan — Full of life
Kyra — Sunlight
Ishaan — Lord of Sun
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चित्र: गुरु हरकृष्ण साहिब जी

सिख · 3 नवंबर 2026

गुरु हरकृष्ण साहिब जी

आठवें सिख गुरु, बाल गुरु, जिन्होंने चेचक की महामारी में दिल्ली के रोगियों की सेवा की।

🔊 कथा सुनें

क्यों मनाया जाता है

गुरु हरकृष्ण साहिब जी (1656–1664) पाँच वर्ष की आयु में गुरु बने। उनके प्रकाश, गुरगद्दी और ज्योति-जोत दिवस गुरपुरब हैं; दिल्ली का गुरुद्वारा बंगला साहिब वहीं है जहाँ वे ठहरे थे।

इसके पीछे की कथा

औरंगज़ेब के बुलावे पर बाल गुरु दिल्ली में राजा जय सिंह के बंगले में ठहरे — आज का गुरुद्वारा बंगला साहिब। जब शहर में चेचक और हैज़ा फैला, तो उन्होंने हर धर्म के रोगियों की सेवा की, और वहाँ के कुएँ का जल आज भी आरोग्य के लिए ले जाया जाता है। स्वयं रोग से ग्रस्त होकर आठ वर्ष की आयु में देह त्यागने से पहले उन्होंने कहा “बाबा बकाले” — अगले गुरु बकाला गाँव में मिलेंगे, जहाँ गुरु तेग बहादुर जी रहते थे।

कैसे मनाएँ

  • गुरुद्वारा बंगला साहिब या पास के गुरुद्वारे जाएँ
  • अरदास की पंक्ति “श्री हरिकृष्ण धिआईऐ जिस डिठै सभि दुखि जाइ” पढ़ें
  • अस्पताल, रक्तदान या स्वास्थ्य शिविर में मदद करें
  • लंगर में सेवा करें

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धर्म की अपनी परंपरा और इतिहास से, सरल शब्दों में। रीति-रिवाज और तिथियाँ समुदायों में अलग हो सकती हैं — अपने उपासना-स्थल और परिवार की परंपरा का पालन करें।

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