
सिख · 8 नवंबर 2026
बंदी छोड़ दिवस
वह दिन जब गुरु हरगोबिंद साहिब जी ग्वालियर क़िले से 52 राजाओं को छुड़ाकर अमृतसर लौटे।
क्यों मनाया जाता है
बंदी छोड़ दिवस — “बंदियों की रिहाई का दिन” — दिवाली को आता है। गुरु जी के स्वागत में हरमंदिर साहिब दीपों और आतिशबाज़ी से जगमगाता है।
इसके पीछे की कथा
जहाँगीर ने गुरु हरगोबिंद साहिब जी को ग्वालियर क़िले में बंदी बनाया था, जहाँ 52 हिंदू राजा भी क़ैद थे। जब बादशाह गुरु जी को छोड़ने को राज़ी हुआ, तो उन्होंने राजाओं के बिना जाने से इनकार किया। जहाँगीर ने कहा कि जो गुरु जी का चोगा पकड़ सके, वह साथ जा सकता है — तो गुरु जी ने 52 कलियों वाला चोगा बनवाया, और हर राजा एक कली पकड़कर बाहर आया। गुरु जी अमृतसर पहुँचे तो शहर ने ख़ुशी में दीप जलाए।
कैसे मनाएँ
- स्वर्ण मंदिर या अपने गुरुद्वारे की दीपमाला देखें
- घर में दीप जलाएँ और मिठाई बाँटें
- अन्याय से बंदी सभी लोगों के लिए अरदास करें
- लंगर में सेवा करें
इस कैलेंडर से और
गुरु नानक देव जीगुरु अंगद देव जीगुरु अमरदास जीगुरु रामदास जीगुरु अर्जन देव जीगुरु हरगोबिंद साहिब जीगुरु हरराय साहिब जीगुरु हरकृष्ण साहिब जीगुरु तेग बहादुर जीगुरु गोबिंद सिंह जीश्री गुरु ग्रंथ साहिब जीसाहिबज़ादों की शहादतवैसाखी · खालसा साजना दिवसहोला मोहल्लामाघी · चाली मुक्तेसंग्रांदमस्या (अमावस)पूरनमाशी