
मुस्लिम · 10 मार्च 2027
ईद-उल-फ़ित्र
रोज़े खोलने का त्योहार, रमज़ान के बाद शव्वाल की पहली तारीख़ को।
क्यों मनाया जाता है
ईद-उल-फ़ित्र रमज़ान के समापन का दिन है। यह शव्वाल का नया चाँद दिखने पर शुरू होती है, और इस दिन रोज़ा रखना मना है।
इसके पीछे की कथा
पैग़ंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने सिखाया कि ईमान वालों के लिए साल में दो ख़ुशी के दिन हैं — ईद-उल-फ़ित्र और ईद-उल-अज़हा। ईद की नमाज़ से पहले हर घर ज़कात-उल-फ़ित्र (फ़ितरा) देता है — ग़रीबों के लिए अनाज या पैसे — ताकि कोई त्योहार के भोजन से वंचित न रहे। यह दिन रोज़े पूरे करने की ताक़त के लिए अल्लाह का शुक्र अदा करने का है।
कैसे मनाएँ
- ईद की नमाज़ से पहले फ़ितरा दें
- नए या साफ़ कपड़े पहनकर ईदगाह या मस्जिद में ईद की नमाज़ पढ़ें
- गले मिलें और “ईद मुबारक” कहें
- शीर ख़ुरमा और सेवइयाँ बाँटें; बच्चों को ईदी दें
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धर्म की अपनी परंपरा और इतिहास से, सरल शब्दों में। रीति-रिवाज और तिथियाँ समुदायों में अलग हो सकती हैं — अपने उपासना-स्थल और परिवार की परंपरा का पालन करें।